। सभी पहाड़ी किले हिन्दुओं के अधिकार में थे और ऊंचे पद भी हिन्दुओं के पास थे। आदिलशाही राज्य में एक हिन्दू रईस को बारह-हजारी के पद पर नियुक्ति मिली। इस वंश के शासकों ने यह आज्ञा निकाली कि सरकारी दफ्तरों में उर्दू के बजाय मराठी भाषा का प्रयोग किया जाये। राज्यों में हिन्दुओं का जोर बढ़ता रहा। निजामशाही राज्य में भी यही नीति प्रारम्भ में जारी रही और हिन्दुओं को प्रतिष्ठा मिलती रही। बुरहान नामक बादशाह ने अपने प्रधानमंत्री कुंवरसेन को पेशवा का खिताब दिया। किन्तु बाद में इसी वंश के बादशाहों ने शिया और सुन्नी के मतभेद पर


विज्ञप्ति 23

जोर देकर अपने राज्य का नाश कर डाला।

इन मुसलमानी राज्यों के अलावा दक्षिण में विजयनगर का राज्य अन्यन्त शक्तिशाली था। इतिहासकार फरिश्ता इस राज्य को वर्गी कह कर पुकारता है। फरिश्ता ने लिखा है कि वर्गी जाति के लोग मुसलमानों को तंग करते रहे तथा 1578


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हम भारत में देखते हैं कि कठोर मुसलमानी शासन में भी भारत के उत्तर, पश्चिम तथा मध्य भाग में हिन्दू राज्यों की स्वतन्त्र सत्ता बनी रही। इन हिन्दू राजाओं ने मुसलमानी तलवार की उपेक्षा कर अपनी आजादी को स्थिर रखा।

16 छत्रपति शिवाजी

मुसलमान इतिहास इस बात के साक्षी हैं कि इस्लाम के प्रारम्भिक आक्रमणकारियों को यह विश्वास हो गया था कि उनका मुकाबला एक शक्तिशाला जाति से होने वाला है। यह तो हिन्दुओं की आपस की फूट तथा धर्महीनता ही थी िकवे अपने शत्रु को नीचा नहीं दिखा सके।


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