में इन्हें पराजित किया। बादशाह ने अपने सेनापति की सहायता से इन वर्गी लोगों को वश में करने की चेष्टा की किन्तु एक विश्वासघाती के कारण यह सम्भव नहीं हो सका। बहुत दिनों तक सारे देश में गड़बढ़ी मची रही। मुगलों ने हिन्दू राजपुतों की सहायता से दक्षिण पर चढ़ाई की । सब से भयंकर आक्रमण औरंगजेब का था जिसने इस्लामी झण्डे के अन्तर्गत सारे भारत में हलचल मचा रखी थी। ठीक इसी समय दक्षिण और पंजाब में दो शक्तिशाली जातियां पैदा हुई जिन्होंने मुसलमानी सत्ता को चकानाचूर कर दिया। इन दोनों शक्तियों के भीतर धार्मिक सुधार का भाव भी काम कर रहा था।

पंजाब में गुरू नानक ने हिन्दुओं को बताया कि वे जातिभेद को त्यागें और ईश्वर के सहारे जीवन बितायें। इस सामायिक शिक्षा का हिन्दुओं पर अच्छा प्रभाव पड़ा। हिन्दुओं में शक्ति का संचार हुआ और मुसलमानों की कट्टरता भी कम हुई। गुरू नानक के बाद के गुरूओं


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ग्यारहवीं शताब्दी तक लगातार विदेशी मुसलमान इस देश में लुटेरों की भांति आते रहे और यहां का धन-वैभव लूट कर ले जाते रहे। महमूद ग़जनवी के समय तक भारत के कुछ ही किले ऐसे थे जिन पर मुसलमानों का अधिकार था। इनमें से भी बहुतों को हिन्दुओं ने पुनः अपने अधिकार में ले लिया था। भारत में मुसलमानी शासन की नींव जमाने वाला, प्रथम विदेशी आक्रमणकारी, हिन्दुओं की स्वतन्त्रता को छीनने वाला शहाबुद्दीन गौरी था। दिल्ली के सिंहासन पर अपना अधिकार जमाने वाला पहला मुसलमान बादशाह


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