नक उनकी रानी और पुत्रों को दिल्ली में बन्दी बना लिया तो इनकी रक्षा करने वाले दुर्गादास ही थे। इन्होंने राजकुमार को सुरक्षित जोधपुर पहंुचाया और मुगलों से युद्व कर मारवाड़ का राज्य पुनः राठौरों को दिलाया। अतः यह स्वीकार करना होगा कि अत्याचारी औरंगजेब के छक्के छुड़ाने में वीर दुर्गादास की भूमिका कम नही थी।
हमने इस देश की अवनति का इतिहास अपने पाठकों के सामने रखा है। हमारा प्रयोजन इतिहास लिखना नहीं है क्योंकि हम जानते हैं कि यह कार्य कठिन तथा समय साध्य है। हम तो अपने भाइयों का ध्यान अपनी विगत अवनति की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं और उन लोगों के भ्रम का दूर करना चाहते हैं जो मानते हैं कि हजार-आठ सौ वर्षो तक हिन्दू लोग मुसलमानों की गुलामी में रहे ही नहीं। कायरता की कलंक कालिमा हिन्दुओं पर नहीं लग सकती और न कोई यह कहने का साहस करेगा कि हिन्दू कभी कायर थे या
18 छत्रपति शिवाजी
उन दिनों दक्षिण प्रान्त की राजधानी देवगढ़ थी। देवगढ़ का राजा रामदेव राय चुपचाप चैन की बंशी बजा रहा था। उसकी सेना तथा साजसामान अस्तव्यस्त थे। उसकी रानियां तथा बच्चे तीर्थ यात्रा पर निकले हुए थे। जब रामदेव राय ने सुना कि अलाउद्दीन ने राजधानी को अपनी सेना से घेर लिया है तो वह अपने साधारण नौकरों को एकत्र कर आक्रमणकारी का मुकाबला करने का विचार करने लगा, परन्तू ये लोग कब तक शत्रु सेना के सामने टिक पाते? राजा अपने बचाव के लिए