भविष्य में होंगे। जाति के तौर पर हिन्दू कभी कायर नहीं रहा। जिस जाति ने अधिसंख्य शूरवीरों को उत्पन्न किया, जिस जाति में राजपूत, सिख, मराठा और जाट जैसी योद्वा जातियां पैदा होती रहीं उसे कायर कहना उचित नहीं। जो मुसलमान हिन्दुओं को कायर कहते हैं वे अपने गिरेबान में मुंह डाल कर देखें, उन्हें सच्चाई का पता चल जायेगा कि उनमें से अधिकांश उन्हीं हिन्दुओं की सन्तान हैं जिन पर वे कायरता का दोष लगाते हैं। भारत के अधिसंख्य मुसलमान रईस हिन्दुओं की संतान हैं। हमारा दावा है कि हिन्दुओं का कोई वर्ग कायर नहीं हैं। कायरता का आरोप मुख्यतः बंगालियों तथा बनियों पर लगाया जाता है किन्तू यह याद रखना होगा कि इन दोनों वर्गो में अनेक वीर हुए हैं। बख्तियार खिलजी ने नदिया (बंगाल) की विजय
विज्ञप्ति 27
का मनसूबा बनाया किन्तू उसे पराजित होकर लौटना पड़ा। प्रायः वाणिज्य व्यवसाय करने वाले लोग लड़ाई-भिड़ाई
एक दूसरे पहाड़ी किले में जा छिपा यह मौका पाकर युवराज अलाउद्दीन खिलजी किले में घुस कर लूटपाट करने लगा और प्रचारित कर दिया कि वह तो थोड़ी सी सेना के साथ आया है, बड़ी सेना साथ लेकर तो खुद बादशाह जलालुद्दीन खिलजी आ रहा है। यह समाचार सुन कर राजा रामदेव राय ने सन्धि करने में ही अपनी भलाई समझी। इधर तो सन्धि की चर्चा चल रही थी, उधर राजा रामदेव राय का पुत्र यात्रा से लौट आया और अपनी सेना के साथ खिलजी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उसने अलाउद्दीन