को सर्वाधिक सम्मान प्राप्त है। आज महारानी विक्टोरिया के शासन में सर्वत्र शान्ति है इसलिए कोई भी धर्म या समुदाय अपनी वीरता के प्रदर्शन का अवसर प्राप्त नहीं कर पाता। अंगे्रजी सरकार ने अपनी बुद्विमत्ता से समस्त जाति को हथियारों से रहित कर दिया है। अतः यह आशा नहीं होती कि निकट भविष्य में हम लोगों को अपनी वीरता या पराक्रम दिखाने का अवसर मिलेगा। इस समय तो कायरता या वीरता की चर्चा केवल दिल बहलाने या मौखिक शास्त्रार्थ के लिए होती है। अब तो वीरता का उदाहरण क्रिकेट या फुटबाल के मैदान में दिखाने का अवसर मिलता है अतः हम हिन्दु नवयुवकों से कहना चाहते हैं कि वे इन खेलों में पीछे न रहें। यह तो सत्य है कि आज हमारे हाथों में हथियार नहीं है, किन्तु यह स्मरण रखना चाहिए कि हमें अपनी रक्षा तो आप ही करनी होगी। अपने धर्म, कर्म, अपनी धन सम्पत्ति यहां तक कि स्व स्त्री तथा परिवार की रक्षा के
का सामना करना पड़ा। उसी समय किले में रूकी खिलजी सेना वहां आ गई। हिन्दू सेना ने समझाा कि यह बादशाह जलालुद्दीन की सेना है। अब उसके पांव उखड़ गये, उसके सिपाई युद्व क्षेत्र से भाग गये और मुसलमानों की विजय हुई। दुर्भाग्य इसे की कहें
विज्ञप्ति 19
कि रसद की सामग्री में जिन्हें आटे के बोरे समझा गया था वे वस्तुतः नमक के बोरे थे। अब राजा रामदेव राय ने पर्याप्त धन तथा राज्य का कुछ इलाका अलाउद्दीन को सौंपने में ही अपनी भलाई समझी और सन्घि कर ली।
इसके बाद