समक्ष यह महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ सुसम्पादित रूप में जाये, इस तथ्य को ध्यान में रखकर सम्पादक ने इसके कुछ अंश का पुनर्लेखन किया है तो अवशिष्ट अध्यायों की भाषा का परिष्कार कर उसे अद्यतन गद्य के निकट लाने का प्रयास किया है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस ग्रन्थ में क्या कुछ है, इसकी समीक्षा तो मराठा इतिहास के प्रामाणिक विद्वा नही करेंगे तथापि सर्वसाधारण को शिवाजी महाराज की वीरता, पराक्रम, धर्मप्रेम तथा देशभक्ति की एक मनोज झांकी मिलेगी, इसी विश्वास के साथ इस ग्रन्थ को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
भवानीलाल भारतीय
शान्तिनिकेतन,
3/5, शंकर कालोनी,
श्रीगंगानगर (राजस्थान)
ज्येष्ठ शु. एकादशी 2061 वि.
विज्ञप्ति
समय के परिवर्तन में जातियों का उत्थान अथवा पतन सहज स्वाभाविक होता है। किसी समय उन्नतिशील रही कोई जाति जब पतन के गहरे गहृर में जा गिरती है, उस समय सिवाय
लालाजी ने ’विज्ञप्ति’ शीर्षक से इस ग्रन्थ की एक विस्तृत भूमिका लिखी। इसमें उन्होंने भारतीय इतिहास का सिंहावलोकन करते हुए हिन्दू राष्ट्र, धर्म एवं समाज के पतन के विभिन्न कारणों की समीक्षा की। साथ ही यह भी बताया कि मुसलमानी शासकों द्वारा किये जाने वाले अत्याचारों का प्रतिरोध करने के लिए पंजाब में सिख, राजपुताना में महाराणा प्रताप और दुर्गादास तथा दक्षिण भारत में मराठा शक्ति का किस प्रकार उदय हुआ और इन प्रबल शक्तियों ने किस प्रकार दुर्दमनीय इस्लामी मतान्ध शासकों के प्रहार का मुकाबला