और देशभक्त बनेंगे। वे ऐसा आदर्श उपस्थित करेंगे जिससे अन्य लोग भी शुद्व और पवित्र जीवन जीना सीखें।
30 छत्रपति शिवाजी
पाद-टिप्पणियां
अध्याय 1
शिवाजी का जीवनचरित
वंश -विवरण
छत्रपति शिवाजी मातृवंश दोनों ओर से राजपूत थे। पितृपक्ष से वह उस पवित्र वंश में उत्पन्न हुए थे, जिसमें बड़े बड़े शूरवीर उत्पन्न हुए थे, जो वंश बहुत समय तक स्वतन्त्र रहा। जिसकी सन्तान अपनी जाति और देश के लिए अनेक बार लड़ी और जिसने बहुत सी कठिनाइयों को झेलते हुए भी मुसलमानों से सम्बंध नही किया। जो आज तक अपनी इस पवित्रता के कारण समस्त राजपूतों में शिरोमणि है। हमारा यह संकेत उदयपुर के राणावंश से है। मातृपक्ष की ओर से शिवाजी एक ऐसे ही प्राचीन राजवंश के हैं। मुसलमानों के आक्रमणों से पहले दक्षिण में यादव वंश के राजपूत राज करते थे जिनकी राजधानी देवगढ़ में भी जिसे
साम्राज्य उन्नति करता रहा। अकबर ही पहला मुसलमान बादशाह था जिसने समस्त भारत को एक साम्राज्य के अधीन करने का विचार किया। उसने ठीक सोचा था कि हिन्दुओं के सहयोग के बिना यह कार्य सम्भव नहीं हैं। अकबर ने अपनी चालाकी से हिन्दुओं को इस प्रकार वश में किया जो उनकी गुलामी का ही पर्याय कहा जा सकता है। पराजित हिन्दू अकबर की कूटनीति के वश में होकर स्वयं को सन्तुष्ट समझने लगे। यह तो अकबर की चतुराई का ही नतीजा था कि करोड़ों हिन्दू उसके अनुवर्ती बन गये। आप इतिहास के किसी ग्रन्थ को देखें उसमें आपको इन दो तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख मिलेगा-