कुछ समय मुहम्मद तुग़लक ने दौलताबाद के नाम से प्रसिद्व किया। शिवाजी के नाना यादवराव जी उसी पूज्य राजघराने के थे। यद्यपि समय के उलट फेर के कारण राज्य की बागडोर हाथ से निकल गई थी, फिर भी यह वंश उस इलाके में प्रतिष्ठित और उच्च गिना जाता था। कुछ इलाके उस समय भी इनके हाथ में थे और मुसलमानी राज्य में भी इस वंश के
32 छत्रपति शिवाजी
राजपूतों को अच्छे अच्छे पद दिये जाते थे।
मराठा वंश में यादवराव का वंश सब से अधिक बली, पराक्रमी, प्रतिष्ठित और जागीरदार था। यादवराव के वंश का एक आदमी निजामशाही बादशाहत में दस हजार का जागीरदार था। उनकेक वंश में सदा देशमुखी चली आती थी। शिवाजी के दादा का नाम ’मालोजी’ भोंसले था जो देरोल ग्राम में रहा करता थां मालोजी का विवाह दक्षिण में एक प्रतिष्ठित वंष में हुआ था जो धनवान् और प्रतिष्ठित होने के अतिरिक्त अधिक प्राचीन भी था।
1. अकबर द्वारा हिन्दुओं को खुश रखने के कारण ही उसे सफलता मिली। 2. हिन्दू सैनिकों ने अपनी वीरता और पराक्रम से मुगल शासन को सुदृढ़ बनाया। अकबर के युद्वों में राजपूत वीरों का बहुत बड़ा योगदान रहा। अकबर ने अपनी बड़ी बड़ी लड़ाइयां हिन्दू सेनापतियों के सहयोग से जीतीं। बीरबल स्वयम् अकबर के पक्ष में लड़ता हुआ मारा गया। अकबर के सहयोगी राजपुतों ने काबुल पर विजय प्राप्त की। कुछ समय तक काबुल में अकबर का एक प्रतिनिधि राजपूत रहता रहा। राजपूतों ने अकबर