बताते हैं। वे कहते हैं कि बहमनी वंश वालों के राज्य में इस वंश का एक मनुष्य एक पहाड़ी किले पर एक जानवर की कमर में रस्सी बांध कर गया। उससे पहले कोई उस किले पर नहीं चढ़ा था, वह किला बड़ा दुर्गम समझा जाता था- उस दिन से उसका नाम भोंसले पड़ा।
छत्रपति शिवाजी 3
मालोजी भोंसले का बड़ा लड़का शाह जी भोंसले था। शाह जी का विवाह यादवराव की कन्या जीजीबाई से हुआ था। इस विवाह की भी एक अनोखी कहानी है। मालोजी भोंसले साधारण जागीरदार थे और यादवराव एक बड़े जागीरदार और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, परन्तु इन दोनों वंशों में अपूर्व प्रेम चला आता था। एक बार मालोजी भोंसले अपने बेटे शाह जी के साथ यादवराव के घर गये। उस समय बालिका जीजीबाई अपने पिता यादवराव के पास बैठी थी। दोनों को आते देख कर यादवराव बहुत खुश हुए और हंसते हंसते अपनी छोटी पुत्री जीजीबाई
प्राप्त कर चुके थे। यह शाहजहां के समय की बात है कि उसके एक बहुत बड़े मुसलमान सरदार मौहम्मत खां ने
विज्ञप्ति 21
अमरसिंह राठौर का अपमान करना चाहा। मौहम्मत खां को इस बात का घमण्ड था कि बादशाह का उससे पारिवारिक सम्बम्ध है तथापि अमरसिंह ने भरे दरबार में मौहम्मत खां का सिर धड़ से अलग कर दिया। खुद बादशाह महलों में जा छिपा। इसके बाद शाही गद्दी पर औरंगजेब बैठा तो सत्ता प्राप्त करने के लिए उसने अपने भाइयों का खून किया, बाप को कैद में डाला