से पुछने लगे कि क्या! तू शाह जी की स्त्री बनना पसन्द करेगी? जो अन्य लोग वहां पर विद्यमान थे उनको सम्बोधन कर यादवराव ने कहा-’’यह क्या अच्छी जोड़ी है?’’ बस यह बात हुई थी कि मालोजी भोंसले आनन्दित हो कहने लगे कि मित्रों! आप लोग साक्षी है, आज यादवराव ने अपनी कन्या का सम्बन्ध मेरे पुत्र शाह जी से कर दिया-’’ जीजीबाई आज से शाह जी की हो गई।’’ परन्तु यादवराव तुरन्त वचन से फिर गया और इसी बात पर दोनों में अनबन हो गई। इसके कुछ समय बाद मालोजी भोंसले को स्वप्न में किसी खजाने का हाल मालूम हुआ और वह बड़े धनपति हो गये। सम्पत्ति के मिल जाने पर इनके वंश की प्रतिष्ठा और बढ़ गई और दरबार से भी 5000 का अधिकार मिल गया। अहमदनगर के दरबारियों ने बीच में पड़ कर मालोजी और यादवराज की फिर मित्रता करा दी और अन्त में शाह जी और जीजीबाई का विवाह हो गया।
और इस्लामी कट्टरता को पुनः जागृत किया। परिणाम यह हुआ कि हिन्दुओं ने औरंगजेब को चैन से नहीं बैठने दिया। इस समय हिन्दू जाति में फिर परिवर्तन आया। औरंगजेब के पतन से लेकर 1847 के विद्रोह तक मुगलवंश का इतिहास हिन्दुओं की राजनैतिक उन्नति और योरोपियन शक्तियों के ताकत पकड़ने का इतिहास है। भारत के पश्चिमी भाग में भी ऐसी ही परिस्थितियां पैदा हो रही थीं। हम लिख चुके हैं कि 13 वीं शताब्दी के अन्त में मुसलमानों ने विन्ध्याचल के पश्चिम में पैर बढ़ाया था। मोहम्मद तुगलक