कहते हैं कि मालोजी भोंसले भवानीदेवी के परमभक्त थे। एक बार देवी ने स्वप्न में मालोजी को दर्शन दिया और कहा कि तेरे वंश में एक प्रतापी राजा होगा जिसमें महादेव जी के समान गुण पाये जायेंगे और वह उन सब दुष्टों का संहार करेगा जो गौ-ब्राह्यणों को सताते और मन्दिर-मूर्तियों को
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तोड़ते हैं। उसका राज्य अधिक काल तक रहेगा। उसकी सत्ताईस पीढ़ियों तक लगातार राज्य की बागडोर स्वतन्त्र रहेगी। मैसूर का इतिहास लेखक कर्नल बेल्कसन ने लिखा है कि एक हिन्दू ग्रन्थ में जो सन् 1646 ई. को लिखा है हमने यह भविष्यवाणी देखी कि ’धर्म का नाश हो गया है’, उच्च से उच्च वंश नष्ट हो गये हैं परन्तु दुःख दूर होने का समय अब निकट आ गया है जबकि कुमारी कन्याएं प्रसन्न बदन गीत गायेंगी और आकाश से फूलों की वर्षा होगी’। जिस समय यह लिखा गया था एस समय शिवा जी का नाम किसी को
के मन में यह विचार आया कि दिल्ली के स्थान पर दक्षिण में देवगढ़ को दौलताबाद बाग नाम देकर नई राजधानी बनाई जाये। इस बादशाह के समय में बहुत से आन्तरिक विद्रोह हुए। खुद मुसलमान अफसर भी बागी हो गये, यहां तक कि दक्षिण के सभी हिन्दू मुसलमानों ने एक षड्यत्र रच कर उस की राजधानी दौलताबाद पर अधिकार कर लिया। इन विद्रोहियों ने जाफर खां नामक एक सामान्य व्यक्ति को राज्याधिकार देकर बादशाह बना दिया। इसने अपने वंश का नाम बहमनी रखा। जाफर खां कभी किसी समय