मालूम ही न था किन्तु कर्नल साहब ने लिखा है कि कुछ समय के बाद लोगों को मालूम हो गया कि वह भविष्यवाणी शिवाजी के आश्चर्य क्रकट करने वाले कर्मो ही के लिए थी। ऐसी ऐसी भविष्यवाणियों से प्रकट होता है कि समय शिवाजी के लिए तैयार था और लोग किसी ऐसे वीर बहादुर के अवतार की प्रतीक्षा कर रहे थे जो उनके धर्म को तात्कालिक क्लेश और कष्टों से बचावे।
मालोजी भोंसले के प्राणान्त के बाद उनके पुत्र शाहजी भोंसले को अहमदनगर के दरबार की तरफ से अपने खर्च के लिए जायदाद और अधिकार मिल गये। कुछ समय पश्चात् यह स्पष्ट ज्ञात हो गया कि शाह जी भोंसले यद्यपि मालोजी भोंसले का पुत्र है, तो भी वह समय था जब जहांगीर के सेनाध्यक्ष दक्षिण विजय करने के लिए तुले खड़े थे और अहमदनगर के प्रसिद्व सेनापति ’मलिक’ से लड़ रहे थे। उस समय सन् 1620 ई. की लड़ाई में शाह जी ने खूब वीरता
किसी ब्राह्यण के यहां काम कर चुका था इसलिए इसने अपने खजाने का स्वामी इसी ब्राह्यण को बना दिया। बहमनी वंश के राजाओं ने हिन्दुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया। राज्य के समस्त पहाड़ी किलों का अधिकार हिन्दू सेना और हिन्दू सेनापतियों को दे दिया। इसके बाद दिल्ली के सुल्तान ने बहमनी सेना को पराजित कर दिया। सुलतान अलाउद्दीन के सेना नायक ने एक हिन्दू राजा को
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पराजित कर उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा। जब राजा इसके लिए सहमत नहीं हुआ तो हिन्दुओं की