अपने विगत वैभव को चिन्तन करने के, उसके पास उत्साहवर्धन का कोई साज सामान नहीं रहता। प्राचीन काल की वैभवशाली और सभ्य जातियों में आज कितनी शेष रही हैं ? मिस्त्र में पिरैमिडों का निर्माण करने वालों की वह पुरानी सभ्यता आज कराल काल के गाल में विलीन हो गई है। इन पुरातन जातियों में चीन का राष्ट्र आज भी जीवित है। रोम नष्ट हो गया, यूनानी मेक्सिको नष्ट हो गया किन्तू नष्ट होते होते उसने एक बार करवट बदली और अपने भविष्य के निर्माण में तत्पर हो गया। एक अन्य जाति भी है जिसकी गौरव पताका किसी समय सारे संसार में लहराई थी, उस समय जब कि वर्तमान में सभ्य कहलाने वाली जातियों का कहीं अता पता नहीं था। इस जाति के शास्त्र और वाणी, धर्म और दर्शन, शील और चरित्र, वीरता और गम्भीरता सभी कुछ सर्वोच्च थी। इसका साक्षी है कि यह जाति की कीर्ति और सभ्यता का गौरव गान कर रहा है।
किया। इस विज्ञप्ति से लालाजी का व्यापक इतिहास परिशीलन तथा विचरण विवेचन-क्षमता का पता चलता है।
लालाजी के द्वारा लिखे गये ये जीवनचरित हमारे अनुमान से उन्नीसवीं शताब्दी की समाप्ति के पहले ही लिखे जा चुके थे। राष्ट्र नेता की भव्य छवि को धारण करने वाले लालाजी का पाठक वर्ग देशव्यापी रहा होगा, यह तो सत्य ही है। अतः उनके लिखे जीवनचरितों का तत्काल हिन्दी अनुवाद हुआ और पाठकों को ये जीवनियां सुलभ हो गई। तथापि यह ध्यान रखना होगा कि आज से सौ वर्ष पहले का हिन्दी गद्य