से प्रसिद्व हो चुका था। बीजापुर के बादशाह ने ऐसे मनुष्य को अपनी सहायता के लिए रखना बहुत अच्छा समझा और पूना का प्रान्त उसकी जागीर में मिला कर दे दिया। कुछ समय बाद कोन्हार, बंगलोर, रोस, कर्टा, बालापुर और सेरा कुछ समय बाद बरार प्रान्त में 22 देहात की देशमुखी भी उनको दे दी गई। इस प्रकार और बहुत से इलाके शाहजी भोंसले को थोडे़ ही समय में प्राप्त हो गये।
अध्याय 2
शिवाजी का जन्म और बाल्यकाल
सन् 1616 ई. में शाहजी भोंसले के घर शिवनेरी नाम के किले में शिवाजी का जन्म हुआ। जिस समय शिवाजी का जन्म हुआ था एस समय शाहजी भोंसले लड़ाई के मैदान में डटे हुए थे। सब से विचित्र बात यह थी कि एक सेना की रतफ से शाहजी थे तो मुकाबले में दूसरी तरफ उनके श्वसुर यादवराव लड़ रहे थे जिसका फल यह हुआ कि थोड़े ही समय में शिवाजी के पिता और माता में मन®मालिन्य
मुसलमान बौखलाये और उन्होंने सिखों पर सीमातीत अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिखों पर सीमातीत अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिख गुरूओं का भी वध कर दिया गया। किन्तू असन्तोष की जो चिन्गारी सुलगी वह अब बुझने वाली नहीं थी। गुरू अर्जुन ने विपत्तियां झेली किन्तु धर्म नहीं छोड़ा। मतीसिंह तथा अन्य अनके सिखों ने धर्म के लिए दुःख सहे।
24 छत्रपति शिवाजी
गुरू तेगबहादुर के बलिदान ने इस चिनगारी को आग का रूप दे दिया। उनके प्रिय पुत्रों ने अपने पिता के जीवन