करना था जो सन् 1636 ई. में पूर्ण हुआ। उस समय जब शिवाजी की अवस्था केवल 19 वर्ष की थी। किला प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने अपना एक वकील बीजापुर भेजा ताकि वह जाकर बादशाह पर यह प्रकट करे कि शिवाजी ने यह काम सिर्फ बादशाही सेवा को सम्मुख रख कर ही किया है। इसने वकीलों द्वारा यह सन्देश

42 छत्रपति शिवाजी

भिजवाया कि ऐसे में शिवाजी जैसे वीर का रहना ही अधिक लाभप्रद होगा। इसके साथ ही पहले के जागीरदारों की अपेक्षा इसने दुगना कर देना भी स्वीकार किया। उधर शिवाजी के वकील इस निवेदन को प्रकट करने के ढंग निकाल रहे थे इधर शिवाजी अपने किले को सुदृढ़ बनाने और सेना बढ़ाने में लगे हुए थे। दरबार वालों ने इस निवेदन के उत्तर में जान बूझ कर देरी की, परन्तू यह विलम्ब शिवाजी ने शस्त्र खरीद हुए एक खजाना हाथ लग गया जिससे शिवाजी ने शस्त्र खरीद कर एक


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पुनः राठौरों को दिलाया। अतः यह स्वीकार करना होगा कि अत्याचारी औरंगजेब के छक्के छुड़ाने में वीर दुर्गादास की भूमिका कम नही थी।

हमने इस देश की अवनति का इतिहास अपने पाठकों के सामने रखा है। हमारा प्रयोजन इतिहास लिखना नहीं है क्योंकि हम जानते हैं कि यह कार्य कठिन तथा समय साध्य है। हम तो अपने भाइयों का ध्यान अपनी विगत अवनति की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं और उन लोगों के भ्रम का दूर करना चाहते हैं जो मानते हैं कि हजार-आठ सौ वर्षो तक हिन्दू लोग मुसलमानों


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