आज्ञा के बिना उसने हिसाब चुकाने के लिए स्पष्ट इन्कार कर दिया। इस बात चिढ़ कर शिवाजी ने अपने मावली सिपाहियों को साथ लेकर रात के समय चढ़ाई कर दी और सम्भाजी मोहिते को उनके साथियों समेत कैद कर लिया।
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मेहिते को उन्होंने कर्नाटक भेज दिया और शेष आदमियों में से जिन्होंने नौकरी स्वीकार कर ली उन्हें अपने पास रख लिया और दूसरों को कर्नाटक अपने पिता के पास रवाना कर दिया। इस इलाके में कर्नाटक और पुरन्दर ही दो किले थे जो शाही अफसरों के अधिकार में थे। सदा से शिवाजी की उन पर दृष्टि लगी थी। उनमें से एक किला तो मुसलमान किलेदार को रिश्वत देकर ले लिया था और दूसरे किले की वह ताक में ही था। संयोग से इसी समय दूसरा किलेदार स्वर्गलोक चला गया।
मृत किलेदार के तीन पुत्र थे जिनमें से बड़ा बेटा बिना शाही आज्ञा प्राप्त किये ही अपने पिता की गद्दी पर बैठ
किन्तु यह स्मरण रखना चाहिए कि हमें अपनी रक्षा तो आप ही करनी होगी। अपने धर्म, कर्म, अपनी धन सम्पत्ति यहां तक कि स्व स्त्री तथा परिवार की रक्षा के
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लिए भी शारीरिक बल की आवश्यकता रहती है।
यदि कोई बलवान् चोर या डाकू हमारी उपार्जित सम्पत्ति को छीन ले और हम अपनी बौद्विक उपाधियों की दुहाई देते रहें तो हमारी नादानी होगी। आगे के पृष्ठों में हम शारीरिक शक्ति, बल, पराक्रम और साहस का एक ऐसा उदाहरण पेश करेंगे जिसने स्वधर्म की रक्षा तथा