गया और किलेदार बन बैठा। दोनों छोटे बेटों ने अपनी मदद के लिए शिवाजी की शरण ली । इस बहाने शिवाजी ने अपनी बड़ी सेना साथ ले पुरन्दर किले के नीचे डेरा जमाया। सब भाइयों ने शिवाजी को उनके कई सरदारों के साथ किले में रहे और मौका पाकर रात में बड़े भाई को कैद कर लिया और शेष दो भाइयों और किला निवासियों को अपनी तरफ मिला लिया। इस कुटनीति से किले को अपने वश में करके बदले में बहुत सी जागीर उन तीनों भाइयों को दे दी और तीेनों को अपनी सेवा में रख लिया।
निदान उसने बहुत ही थोड़े समय में बिना किसी प्रकार की लड़ाई के समस्त जागीर अपने हाथ में करली जो इस समय महल और कबरें बनाने के धुन में था। और इसका सेनापति शाहजी कर्नाटक की लड़ाई में था और घूम घूम कर दौरा कर रहा था।
अध्याय 3
शाहजी का कैद होना और छुटकारा
21 वर्ष की अवस्था तक
अपने वंश की उन्नति के लिए कैसा पुरूषार्थ किया था। शिवाजी का जन्म ऐसे युग में हुआ था जब भारत से विद्या और धर्मप्रेम प्रायः समाप्त हो चुका था और परिवार के सदस्यों का पारस्परिक विश्वास और प्रेम लुप्त हो रहा था। किसी का धर्म या धन सुरक्षित नहीं था। सचमुच वह समय बड़ा विकट था जबकि हिन्दू और मुसलमान दोनों के लिए युद्व का भय उपस्थित रहता था। उस समय खून की नदियां बह रही थीं। बडे़ बडे़ शहर विनाश के कगार पर खडे़ थे। धनी पल भर में कंगाल हो जाते और दरिद्रों