जो कार्य शिवाजी ने किये हैं वह ऊपर लिखे जा चुके हैं। स्वतन्त्रता और राजपाट की प्रबल अभिलाषा ने शिवाजी को धन जमा करने की सुबुद्वि दी। वह नवीन युद्वों के लिए नई नई सामग्रियां तैयार कराने लगे। एक ओर तो सेना इकट्ठी करके उसको सजाना प्रारम्भ किया, दूसरी तरफ अपने दूत समस्त इलाकों में भ्रमण करने के लिए भेज दिये, ताकि वे हिन्दू प्रजा में मुसलमानों के प्रति घृणा का भाव उत्पन्न करें।

शिवाजी की इस स्वतन्त्र कार्यवाही पर यदि किसी को आश्चर्य हो तो वह शीध्र इस घटना से दूर हो गया होगा। जो इस बात का पूरा सबूत है कि शिवाजी अपने आप को किसी बादशाह के अधीन न समझता था। इसीलिए वह किसी से नहीं दबता था। जब उसको यह समाचार मिला कि मुल्ला अहमद ( कल्याण का अध्यक्ष) ने एक बहुत बड़ा खजाना बिहार की ओर भेजा है त बवह 200 सवार लेकर चल पड़ा और उसे लूट लिया। जिस


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को धनी बनाने में भी देर नहीं लगती थी। न मन्दिर सुरक्षित थे और न मस्जिदें।

ऐसी भीषण स्थिति में जन्म लेकर शिवाजी ने अपने सघन धर्मपे्रम का परिचय दिया और नारियों के सतीत्व की रक्षा की। न केवल अपना ही आचरण शुद्व रखा अपितु किसी भी व्यक्ति को नारी का अपमान करने पर घोर दण्ड दिया। गरीब किसानों की रक्षा की और उनके प्रति सद् व्यवहार किया । उसने ब्राह्यणों की रक्षा की और उनके प्रति सद् व्यवहार किया। उसने ब्राह्यणों की रक्षा की किन्तु परमत का खण्डन भी नहीं किया । यह


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