समय इस लॅअ की ख़बर बीजापुर पहंुची उसी समय यह ख़बर भी मिली कि शिवाजी ने निम्नलिखित किलों पर कब्जा कर लिया। कंगोरी-टोगटकोन-भोरप-कादरी लोहगढ़ और राममोची। इनके अतिरिक्त शिवाजी के आदमियों ने ताला, गोशाला और ’राइरी’ नाम के ग्रामों पर भी अपना अधिकार कर लिया और कोंकण केक इलाके के बहुत से शहरों को लूट कर राजगढ़ में बहुत सी सम्पत्ति एकत्रित कर ली है।
शिवाजी के साथ साथ दादाजी कोंड़देव ने जिन लड़कों को शिक्षा दी थी उनमें से एक का नाम आवाजी
छत्रपति शिवाजी 47
सेमदेव था जो केवल वीर ही नहीं बल्कि धीर, चतुर और तीक्ष्ण बुद्वि का भी था। इसी ने ’कल्याण’ पर चढ़ाई करके मुल्ला अहमद को कैद किया था। बस इतना होते ही इस इलाके में जो किले थे सब सोमदेव के हाथ आ गये। इस बात पर शिवाजी बहुत खुश हुआ और ’कल्याण’ पहुंच कर उसने बहुत सा धन
महापुरूष औरंगजेब के काल का महान् वीर था। एक पक्षपाती मुसलमान इतिहासकार खाफी खां ने शिवाजी को ’काफिर’ कहा और उनकी मृत्यु पर लिखा कि वह नरक में गया तथापि उसने शिवाजी के सदाचार की प्रशंसा ही की है।
इस पुस्तक में शिवाजी का जो जीवनचरित लिखा गया है उसे पढ़ कर पाठकों को निश्चय हो जायेगा कि शिवाजी सचमुच महापुरूष थे। उनमें जैसी प्रबन्ध क्षमता थी वह अन्यत्र
विज्ञप्ति 29
दुलर्भ थी। वे संगठन का महत्त्व तथा संगठन के सिद्वांतों को भली भांति जानते थे। यदि