पर थे, बादशाह ने अभी तक शिवाजी के साथ कोई कार्यवाही नहीं की। बादशाह ने उसे एक चिट्ठी लिख भेजी कि जिस तरह हो सके शाहजी को गिरफ्तार कर ले। बाजी घारपुरे ने शाहजी को निमन्त्रण देकर अपने घर पर बुलया और धोखे से कैद कर दरबार में भिजवा दिया। जब शाहजी को उसकी इन करतूतों से रोको नही ंतो तुम्हारी कुशलता नहीं। शाहजी ने शिवाजी के पास पत्र भेज कर बहुतेरा चाहा कि वह शान्त हो परन्तू शिवाजी ने पिता के पत्र का कोई उत्तर न दिया। उधर शाहजी ने बादशाह से बहुतेरा कहा कि शिवाजी से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है। वह
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बादशाह का बागी है और मुझ से बग़ावत ठानता है। शाहजी की इन बातों पर बादशाह ने कुछ भी ध्यान न दिया और क्रोध में आकर आज्ञा दे दी कि शीध्र ही शाहजी काो किसी अंधेरे गढ़े में कैद कर दिया जाय और वहां एक छोटा सूराख छोड़ कर कोई द्वार
में अद्वितीय थे। उनका आचरण शुद्व एंव पवित्र था, यही कारण है कि इस महापुरूष की जीवन कथा हम अपने देश के युवकों को सुनाना चाहते हैं। हमें विश्वास है कि इस जीवनचरित को पढ़ कर हमारे युवक भी सदाचारी और देशभक्त बनेंगे। वे ऐसा आदर्श उपस्थित करेंगे जिससे अन्य लोग भी शुद्व और पवित्र जीवन जीना सीखें।
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पाद-टिप्पणियां
अध्याय 1
शिवाजी का जीवनचरित
वंश -विवरण
छत्रपति शिवाजी मातृवंश दोनों ओर से राजपूत थे। पितृपक्ष से वह उस