गया। लड़के कैद कर लिये गये और ’जावली’ में राघो बल्लाल का अधिकार हो गया। समस्त मरहठा इतिहास लेखक एकमत होकर लिखते हैं कि राघोबल्लाल आदि ने यह काम शिवाजी को बिना सूचना दिये किया था इसलिए यह दग़ाबाजी शिवाजी के मत्थे नहीं मढ़ी जा सकती है। राजा चन्द्राराव का राज्य शिवाजी के हाथ आ जाने से उनकी शक्ति और ज्यादा बढ़ गई और उन्होंने ’खेरा’ पर भी अधिकार कर लिया। खेरा की लड़ाई में ’बन्दल देशमुख ने’ जो आक्रमण के समय किले में था, खूब वीरता से मुकाबला किया और उसके आदमियों ने तब तक अधीनता का नाम भी नहीं लिया था जब

50 छत्रपति शिवाजी

तक कि ’बन्दल’ लड़ता हुआ मारा न गया। अन्त में किला शिवाजी के हाथ आया और मुकाबला करने वालों में से देशमुख बाजी बड़े सम्मान से मिला। शिवाजी ने उसको उसके पिता के सम्पूर्ण अधिकार दे दिये और उसे अपनी अधीनता में रख लिया


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से भी पुकारते थे। जगपाल अपने समय में एक नामी लड़ाकू वीर हो गया है। बीजापुर के राज्य में उसका वंश दूसरे नम्बर का था परन्तु स्वतन्त्रता की अभिलाषा ने जगपाल को स्वतन्त्र लड़ाइयों और लूट मार करने पर प्रस्तुत कर दिया। जगपाल की बहिन मालोजी को व्याही थी, ’’भोंसले’’ उनके राजवंश की उपाधि थी। ठीक पता नहीं चलता कि यह भोंसले शब्द किस शब्द का अपभ्रंश रूप है। एक मुसलमान इतिहास लेखक ने लिखा है कि ’’भोंसले’’ शब्द ’घोसले’ का अपभ्रंश है। चुंकि इनका प्रथम पूर्वज


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