और एक पैदल सेना की बड़ी संख्या उसको दी गई जिसे पाकर उसने अपनी बाकी आयु बड़ी भक्ति के साथ शिवाजी की सेवा में व्यतीत की।

’नीर’ अथवा क्रिश्ना (कृष्णा) नदी के किनारे पर जो इलाका शिवाजी का था उसकी रक्षा में नदी के उद्गम पर किला बनाने का काम आरम्भ कर दिया। इस किले का नाम प्रतापगढ़ रखा गया। निदान इस प्रकार अपनी सेना बढ़ाकर और राज्य विस्तार करके शिवाजीी ने बीजापुर से अधिक शक्ति वाली रियासत को हानि पहंुचाने की मन में ठानी।

अध्याय 4

मुगलवंश के विरूद्व शिवाजी की कार्यवाही का आरम्भ

शिवाजी की नवीन कार्यवाही का वृत्तान्त सुनाने के पहले इतिहास की मर्यादा को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है कि संक्षेप में उस चालबाजी का भी जिक्र करें जिसके कारण औरंगजेब हिन्दुस्तान के इतिहास में शतरंजी चालें चल कर पैंतरे बदल रहा था। यहां तक कि अपने पिता बादशाह शाहजहां को हराकर उसने


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अर्थात् वह वीर जो पहले पहल राजपूताने से पिता के साथ महाराष्ट्र में आया, वर्षो तक जंगलों में भटकता रहा, इस कारण इस का घोंसला वंश हो गया जो बिगड़ कर भोंसले हो गया। परन्तु ग्रान्टडफ़ साहब इसका कुछ और कारण बताते हैं। वे कहते हैं कि बहमनी वंश वालों के राज्य में इस वंश का एक मनुष्य एक पहाड़ी किले पर एक जानवर की कमर में रस्सी बांध कर गया। उससे पहले कोई उस किले पर नहीं चढ़ा था, वह किला बड़ा दुर्गम समझा जाता था- उस दिन से उसका नाम भोंसले पड़ा।


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