बाजी मार ली थी। प्रायः दिल्ली के समस्त बादशाह दक्षिण की मुसलमानी बादशाहतों को हड़प् करने की फिक्र में रहा करते थे क्योंकि दिल्ली की बादशाहत स्थिर रखने के लिए यह आवश्यक था कि गोलकुण्डा और बीजापुर के बादशाह सदैव कर देते रहें। शाहजहां ने भी इनके विरूद्व कई बार लड़ाइयां की थी और कुछ हानि पहुंचाई थी। कुछ दिन तो यह राज्य एकत्रित होकर मुगल राज्य के सामने डटे रहे किन्तु उनके दुर्भाग्य से दूसरी बार औरंगजेब को सदैव इस बात का ध्यान रहता था कि इन दोनों रियासतों को हराकर मुगल राज्य के सूबे कायम कर दिये जायें। रियासतों को हराकर मुगल राज्य के सूबे कायम कर दिये जायें। इन दोनों राज्यों में हिन्दुओं का अधिक जोर था । हिन्दू पदाधिकारियों का बड़ा सम्मान होता था। गोलकुण्डा का बादशाह इस समय कुतुबशाह था और मीर जुमला जो हिन्दुस्तान में एक प्रसिद्व मनुष्य हुआ है, उसका प्रधानमंत्री था। मीरजुमला
छत्रपति शिवाजी 3
मालोजी भोंसले का बड़ा लड़का शाह जी भोंसले था। शाह जी का विवाह यादवराव की कन्या जीजीबाई से हुआ था। इस विवाह की भी एक अनोखी कहानी है। मालोजी भोंसले साधारण जागीरदार थे और यादवराव एक बड़े जागीरदार और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, परन्तु इन दोनों वंशों में अपूर्व प्रेम चला आता था। एक बार मालोजी भोंसले अपने बेटे शाह जी के साथ यादवराव के घर गये। उस समय बालिका जीजीबाई अपने पिता यादवराव के पास बैठी थी। दोनों को आते देख कर यादवराव बहुत