के पुत्र मुहम्मद अमीन से कुछ अपराध हो गया था और बादशाह ने उसको दण्ड देने की ठानी थी। मीरजुमला को यह बुरा मालूम हुआ और उसने शाहजहां के पास इस बात की शिकायत की। औरंगजेब ने भी शाहजहां को खूब पट्टी पढ़ाई क्योंकि वह लड़ाई के लिए कोई बहाना ढूंढ़ रहा था। इसका फल यह हुआ कि शाहजहां ने क्रोध में आकर एक बड़ी चिट्ठी लिखी। कुतुबशाह को यह बात बड़ी बुरी लगी। उसने तुरन्त अमीन को कैद कर लिया और मीरजुमला की समस्त सम्पत्ति जब्प कर ली। बस फिर क्या था, औरंगजेब को मनमाना अवसर मिल गया और उसने तत्काल लड़ाई की ठान ली। औरंगजेब की लड़ाई में कुछ काम धोखेबाजी से लिया जाता था। इस अवसर पर भी उसने अपने बड़े बेटे मुहम्मद को बहुत सेना देकर गोलकुण्डा की तरफ रवाना किया किन्तु कुतुबशाह को यह सूचना दी कि ’शाहजादा’ शादी करने के लिए अपने चचा बंगाल के
खुश हुए और हंसते हंसते अपनी छोटी पुत्री जीजीबाई से पुछने लगे कि क्या! तू शाह जी की स्त्री बनना पसन्द करेगी? जो अन्य लोग वहां पर विद्यमान थे उनको सम्बोधन कर यादवराव ने कहा-’’यह क्या अच्छी जोड़ी है?’’ बस यह बात हुई थी कि मालोजी भोंसले आनन्दित हो कहने लगे कि मित्रों! आप लोग साक्षी है, आज यादवराव ने अपनी कन्या का सम्बन्ध मेरे पुत्र शाह जी से कर दिया-’’ जीजीबाई आज से शाह जी की हो गई।’’ परन्तु यादवराव तुरन्त वचन से फिर गया और इसी बात पर दोनों