बादशाह बीजापुर का बेटा नहीं है और इस बहाने बीजापुर पर चढ़ाई कर दी। मीर जुमला और औरंगजेब इस लड़ाई में अफसर थे। बहुत सी लड़ाई और मुकाबले के पश्चात् बादशाह बीजापुर में न ठहर सका उसने क्षमा की प्रार्थना
छत्रपति शिवाजी 53
करनी शुरू की। जब औरंगजेब को शाहजहां के बीमार पड़ जाने की ख़बर मिली तो बीजापुर के बादशाह से सन्धि करके वह झट दिल्ली रवाना हो गया। इधर मुरादबख्श और शुजा भी आगरे की तरफ आ रहे थे। ’दारा शिकोह’ शाहजहां की आज्ञानुसार राजधानी का कार्य कर रहा था। औरंगजेब ने लौटते ही मुराद को दम दिलासा दिया कि मैं तो फकीर हूं। मुझे राज्याधिकार से कोई सम्बन्ध नहीं है दारा शिकोह और शुजा को बस में करके तुम्हें गद्दी पर बिठाऊंगा और मैं अलग होकर खुदा का भजन करूंगा, क्योंकि मुझे तो खुदा की भक्ति चाहिए। राज्य से मुझे क्या काम। अपने दुर्भाग्य से मुराद
और कहा कि तेरे वंश में एक प्रतापी राजा होगा जिसमें महादेव जी के समान गुण पाये जायेंगे और वह उन सब दुष्टों का संहार करेगा जो गौ-ब्राह्यणों को सताते और मन्दिर-मूर्तियों को
34 छत्रपति शिवाजी
तोड़ते हैं। उसका राज्य अधिक काल तक रहेगा। उसकी सत्ताईस पीढ़ियों तक लगातार राज्य की बागडोर स्वतन्त्र रहेगी। मैसूर का इतिहास लेखक कर्नल बेल्कसन ने लिखा है कि एक हिन्दू ग्रन्थ में जो सन् 1646 ई. को लिखा है हमने यह भविष्यवाणी देखी कि ’धर्म का नाश हो गया है’, उच्च से उच्च