इस पट्टी में आ गया। मुराद और औरंगजेब की सेनाओं ने मिलकर दाराशिकोह की फौज को भगा दिया। इस प्रकार एक एक करके औरंगजेब ने अपने भाइयों को पकड़ पकड़ कर धोखे से मरवा डाला। पिता शाहजहां को कैद करके स्वयं बादशाह बन बैठा। यह समस्त वृत्तान्त हिन्दुस्तान के इतिहासकार भली प्रकार जानते हैं। निदान 1657 ई. में औरंगजेब आगरा के सिहंासन पर विराजमान हो गया। शिवाजी भी औरंगजेब को खूब जानते थे। उन्होंने शिवाजी से सन्धि कर लेने की आज्ञा दे दी और कहा कि जो इलाके शिवाजी ने बीजापुर की रियासत से छीने हैं वह उन्हीं के पास रहेंगे और साथ ही यह भी हुक्म दे दिया कि ’दावल’ और समुद्र किनारे के अन्य मुकाम भी शिवाजी ले लें। यों तो बीजापुर के राज्य को शक्तिहीन करने की यह चाल थी परन्तु वास्तव में औरंगजेब ने शिवाजी को कैद करने की चेष्टा की थी। इस प्रकार अनेक युक्तियां की गई। बीसों
वंश नष्ट हो गये हैं परन्तु दुःख दूर होने का समय अब निकट आ गया है जबकि कुमारी कन्याएं प्रसन्न बदन गीत गायेंगी और आकाश से फूलों की वर्षा होगी’। जिस समय यह लिखा गया था एस समय शिवा जी का नाम किसी को मालूम ही न था किन्तु कर्नल साहब ने लिखा है कि कुछ समय के बाद लोगों को मालूम हो गया कि वह भविष्यवाणी शिवाजी के आश्चर्य क्रकट करने वाले कर्मो ही के लिए थी। ऐसी ऐसी भविष्यवाणियों से प्रकट होता है कि समय शिवाजी के लिए तैयार था और लोग किसी ऐसे वीर बहादुर