तरकीबें निकाली गई परन्तु शिवाजी औरंगजेब के हाथ न आयें, अलग ही रहे। इससे स्पष्ट ज्ञात हो गया कि शिवाजी अब औरंगजेब से दो दो हाथ करने को तैयार हैं।

54 छत्रपति शिवाजी

शिवाजी ने सन् 1657 ई. के मई महीने में रात के समय ’’जुनार’’ शहर (जो मुगलों के इलाके में था) को घेर लिया और खूब लूटा। यहां से उनको तीन लाख ’गोपड़ा करन’ घोड़े, बहुत से अपूल्य वस्त्र और अन्यान्य वस्तुएं प्राप्त हुई जिन्हें शिवाजी ने तुरन्त पूना और रामगढ़ भिजवा दिया। शिवाजी स्वयं ऐसे मार्ग से, जिन पर बहुत आदमी नहीं चलते थे, चल कर अहमदनगर पहंुचा और उसे लूटना शुरू कर दिया। इन्होंने बहुत घोड़े खरीदे और सवारों को नौकर रखा। मानकजी को, जो उनके पिता का विश्वासपात्र नौकर था फौज का अफसर बना दिया और एक अन्य लोकप्रिय मरहठा शिरोमणि नेताजी पालकर को भी अपने साथ ले लिया। शिवाजी


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के अवतार की प्रतीक्षा कर रहे थे जो उनके धर्म को तात्कालिक क्लेश और कष्टों से बचावे।

मालोजी भोंसले के प्राणान्त के बाद उनके पुत्र शाहजी भोंसले को अहमदनगर के दरबार की तरफ से अपने खर्च के लिए जायदाद और अधिकार मिल गये। कुछ समय पश्चात् यह स्पष्ट ज्ञात हो गया कि शाह जी भोंसले यद्यपि मालोजी भोंसले का पुत्र है, तो भी वह समय था जब जहांगीर के सेनाध्यक्ष दक्षिण विजय करने के लिए तुले खड़े थे और अहमदनगर के प्रसिद्व सेनापति ’मलिक’ से लड़ रहे थे। उस समय


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