में भेजना निश्चय हुआ िकवह दरबार में जाकर इस बात की चर्चा चलावें। शिवाजी को इसने आज्ञा भेजी तथा शेष सेना से राजमण्डल का प्रबन्ध करे। शिवाजी तथा औरंगजेब एक दूसरे को खूब जानते थे किन्तु ऐसा ज्ञात होता है कि वह पत्र-व्यवहार यहां तक रहा और आगे कोई फल नहीं हुआ अर्थात् कोई विशेष प्रतिज्ञा नहीं हुई। शिवाजी ने ’कोंकण’ प्रान्त पर अधिकार करने के लिए तत्काल तैयारी शुरू कर दी और समुद्र तट के बहुत से स्थानों को अपने अधिकार में कर लिया।
सामुदायिक कार्य के लिए शिवाजी ने कुछ बेड़े बनवाये। 700 पठान सिपाही भी नौकर रखे। शिवाजी की यह इच्छा थी कि मुसलमानों को न नौकर रखा जाये परन्तू ’गामाजी’ नायक ने जो इनके मामा का अत्यन्त बुद्विमान और विश्वस्त नौकर था शिवाजी को समझा बुझा कर सात सौ पठान नौकर रख लिये जो बीजापुर से निकाले हुए सिपाही थे। राघो बल्लाल इन पठानों का नायक
में शाहजहां मुगल राज्य के सिंहासन पर बैठा। शाहजहां की उस सेनापति से जो दक्षिण के मैदान में लड़ रहा था कुछ रंजिश थी। उसने तुरन्त ही खांजहां लोदी को दक्षिण के युद्व से वापस बुला लिया। जब खांजहां लोदी दरबार में आया तो उसे कुछ बेइमानी के लक्षण दिखाई पड़े। वह झट भाग कर दक्षिण चला गया और निजामशाही (अहमदनगर) राज्य की शरण में रहने लगा। शाहजहां ने इसके पीछे बहुत सी सेना भेजी। परन्तु दक्षिण की समस्त हिन्दू रियासतों ने और शाहजी भोंसले आदि ने खांजहां लोदी को